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ramayan 6.57.36-38h: ग्रह क्रोध में आकर आपस में लड़ने लगे, जिससे उनका प्रकाश मंद पड़ गया और बादल राक्षस के रथ पर गधों की तरह गरजने लगे, रक्त की वर्षा करने लगे और आगे जाने वाले सैनिकों को खींचने लगे। उसके ध्वज पर दक्षिण दिशा की ओर मुख करके एक गिद्ध बैठा था। उसने दोनों ओर अपनी अशुभ भाषा बोलकर राक्षस की सारी शोभा और धन-संपत्ति छीन ली।   |   ramayan सर्ग 6.57: प्रहस्त का रावण की आज्ञा से विशाल सेना सहित युद्ध के लिये प्रस्थान   ।   ramayan काण्ड 6: युद्ध काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 57: प्रहस्त का रावण की आज्ञा से विशाल सेना सहित युद्ध के लिये प्रस्थान  »  श्लोक 36-38h
 
 
श्लोक  6.57.36-38h 
अन्योन्यमभिसंरब्धा ग्रहाश्च न चकाशिरे।
मेघाश्च खरनिर्घोषा रथस्योपरि रक्षस:॥ ३६॥
ववर्षू रुधिरं चास्य सिषिचुश्च पुर:सरान्।
केतुमूर्धनि गृध्रस्तु विलीनो दक्षिणामुख:॥ ३७॥
नदन्नुभयत: पार्श्वं समग्रां श्रियमाहरत्।
 
 
अनुवाद
ग्रह क्रोध में आकर आपस में लड़ने लगे, जिससे उनका प्रकाश मंद पड़ गया और बादल राक्षस के रथ पर गधों की तरह गरजने लगे, रक्त की वर्षा करने लगे और आगे जाने वाले सैनिकों को खींचने लगे। उसके ध्वज पर दक्षिण दिशा की ओर मुख करके एक गिद्ध बैठा था। उसने दोनों ओर अपनी अशुभ भाषा बोलकर राक्षस की सारी शोभा और धन-संपत्ति छीन ली।
 
The planets began to fight with each other in anger, due to which their light dimmed and the clouds began to roar like donkeys over the chariot of the demon, showering blood and pulling the soldiers who were going ahead. A vulture sat on his flag facing south. It took away all the beauty and wealth of the demon by speaking its ominous language on both sides. 36-37 1/2.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)