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श्लोक  6.57.30 
नरान्तक: कुम्भहनुर्महानाद: समुन्नत:।
प्रहस्तसचिवा ह्येते निर्ययु: परिवार्य तम्॥ ३०॥
 
 
अनुवाद
नरान्तक, कुम्भहनु, महानद और समुनात् - इन चार सचिवों ने प्रहस्त को चारों ओर से घेर लिया।
 
Narantaka, Kumbhhanu, Mahanad and Samunat—these four secretaries of Prahastha surrounded him from all sides.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)