Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
ramayan 6.57.26-27h: सर्पाकार अथवा सर्प से अंकित ध्वजा के कारण वह अत्यंत भयंकर प्रतीत होता था। रथ की रक्षा के लिए प्रयुक्त कवच अत्यंत सुंदर प्रतीत होता था। उसके सभी अंग सुंदर थे और वह उत्तम पदार्थों से अलंकृत था। रथ सोने से जड़ा हुआ था। वह अपनी चमक से ऐसा प्रतीत होता था मानो हँस रहा हो (अथवा मानो अन्य चमकदार वस्तुओं का उपहास कर रहा हो)।॥26 1/2॥   |   ramayan सर्ग 6.57: प्रहस्त का रावण की आज्ञा से विशाल सेना सहित युद्ध के लिये प्रस्थान   ।   ramayan काण्ड 6: युद्ध काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 57: प्रहस्त का रावण की आज्ञा से विशाल सेना सहित युद्ध के लिये प्रस्थान  »  श्लोक 26-27h
 
 
श्लोक  6.57.26-27h 
उरगध्वजदुर्धर्षं सुवरूथं स्वपस्करम्॥ २६॥
सुवर्णजालसंयुक्तं प्रहसन्तमिव श्रिया।
 
 
अनुवाद
सर्पाकार अथवा सर्प से अंकित ध्वजा के कारण वह अत्यंत भयंकर प्रतीत होता था। रथ की रक्षा के लिए प्रयुक्त कवच अत्यंत सुंदर प्रतीत होता था। उसके सभी अंग सुंदर थे और वह उत्तम पदार्थों से अलंकृत था। रथ सोने से जड़ा हुआ था। वह अपनी चमक से ऐसा प्रतीत होता था मानो हँस रहा हो (अथवा मानो अन्य चमकदार वस्तुओं का उपहास कर रहा हो)।॥26 1/2॥
 
Because of the flag in the shape of a snake or marked with a snake, it appeared to be very fearsome. The armour used to protect the chariot looked very beautiful. All its parts were beautiful and it was adorned with the best materials. The chariot was lattice with gold. It appeared to be laughing with its brilliance (or as if it was mocking other lustrous objects).॥26 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)