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ramayan 6.57.16: मुझे अपने प्राण, स्त्री, पुत्र और धन आदि की रक्षा करने की आवश्यकता नहीं है - मुझे उनकी रक्षा की कोई चिंता नहीं है। तुम देखो, मैं युद्ध की ज्वाला में तुम्हारे लिए किस प्रकार अपने प्राणों का बलिदान करता हूँ॥16॥   |   ramayan सर्ग 6.57: प्रहस्त का रावण की आज्ञा से विशाल सेना सहित युद्ध के लिये प्रस्थान   ।   ramayan काण्ड 6: युद्ध काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  6.57.16 
नहि मे जीवितं रक्ष्यं पुत्रदारधनानि च।
त्वं पश्य मां जुहूषन्तं त्वदर्थे जीवितं युधि॥ १६॥
 
 
अनुवाद
मुझे अपने प्राण, स्त्री, पुत्र और धन आदि की रक्षा करने की आवश्यकता नहीं है - मुझे उनकी रक्षा की कोई चिंता नहीं है। तुम देखो, मैं युद्ध की ज्वाला में तुम्हारे लिए किस प्रकार अपने प्राणों का बलिदान करता हूँ॥16॥
 
‘I do not have to protect my life, wife, son and wealth etc. – I am not worried about protecting them. You see how I sacrifice my life for you in the flames of war.’॥ 16॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)