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ramayan 6.57.13: (उसने कहा-) 'राजन्! हम पहले भी अपने योग्य मन्त्रियों के साथ इस विषय पर विचार कर चुके हैं। उन दिनों हम लोगों में एक-दूसरे की राय की आलोचना करते हुए आपस में विवाद हो गया था (हम किसी एकमत निर्णय पर नहीं पहुँच सके थे)॥13॥   |   ramayan सर्ग 6.57: प्रहस्त का रावण की आज्ञा से विशाल सेना सहित युद्ध के लिये प्रस्थान   ।   ramayan काण्ड 6: युद्ध काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 57: प्रहस्त का रावण की आज्ञा से विशाल सेना सहित युद्ध के लिये प्रस्थान  »  श्लोक 13
 
 
श्लोक  6.57.13 
राजन् मन्त्रितपूर्वं न: कुशलै: सह मन्त्रिभि:।
विवादश्चापि नो वृत्त: समवेक्ष्य परस्परम्॥ १३॥
 
 
अनुवाद
(उसने कहा-) 'राजन्! हम पहले भी अपने योग्य मन्त्रियों के साथ इस विषय पर विचार कर चुके हैं। उन दिनों हम लोगों में एक-दूसरे की राय की आलोचना करते हुए आपस में विवाद हो गया था (हम किसी एकमत निर्णय पर नहीं पहुँच सके थे)॥13॥
 
(He said-) 'King! We have discussed this matter earlier also with our able ministers. In those days, there was a dispute amongst us by criticising each other's opinion (we were not able to reach a unanimous decision).॥ 13॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)