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ramayan 6.57.11: युद्ध में मृत्यु संदिग्ध है, हो भी सकती है और नहीं भी। परन्तु ऐसी मृत्यु श्रेष्ठ है। (इसके विपरीत) जो मृत्यु प्राणों को संदेह (जोखिम) में डाले बिना (युद्धभूमि में जाए बिना) हो, वह श्रेष्ठ नहीं है (ऐसा मेरा मत है)। आप जो भी हमारे लिए हितकर समझें, उसके पक्ष में या विपक्ष में, वह हमें बताएँ।॥11॥   |   ramayan सर्ग 6.57: प्रहस्त का रावण की आज्ञा से विशाल सेना सहित युद्ध के लिये प्रस्थान   ।   ramayan काण्ड 6: युद्ध काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 57: प्रहस्त का रावण की आज्ञा से विशाल सेना सहित युद्ध के लिये प्रस्थान  »  श्लोक 11
 
 
श्लोक  6.57.11 
आपत्संशयिता श्रेयो नात्र नि:संशयीकृता।
प्रतिलोमानुलोमं वा यत् तु नो मन्यसे हितम्॥ ११॥
 
 
अनुवाद
युद्ध में मृत्यु संदिग्ध है, हो भी सकती है और नहीं भी। परन्तु ऐसी मृत्यु श्रेष्ठ है। (इसके विपरीत) जो मृत्यु प्राणों को संदेह (जोखिम) में डाले बिना (युद्धभूमि में जाए बिना) हो, वह श्रेष्ठ नहीं है (ऐसा मेरा मत है)। आप जो भी हमारे लिए हितकर समझें, उसके पक्ष में या विपक्ष में, वह हमें बताएँ।॥11॥
 
‘Death in war is doubtful, it may or may not happen. But such a death is the best. (On the contrary) death that occurs without putting life in doubt (risk) (without going to the battlefield) is not the best (this is my opinion). Whatever you think is beneficial for us, in favour or against this, tell us.'॥ 11॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)