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ramayan 6.56.14: उस समय गर्जना करते और तेज से प्रकाशित होते हुए हनुमानजी का रूप प्रज्वलित अग्नि के समान भयंकर हो गया था॥14॥   |   ramayan सर्ग 6.56: हनुमान जी के द्वारा अकम्पन का वध   ।   ramayan काण्ड 6: युद्ध काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 56: हनुमान जी के द्वारा अकम्पन का वध  »  श्लोक 14
 
 
श्लोक  6.56.14 
तस्याथ नर्दमानस्य दीप्यमानस्य तेजसा।
बभूव रूपं दुर्धर्षं दीप्तस्येव विभावसो:॥ १४॥
 
 
अनुवाद
उस समय गर्जना करते और तेज से प्रकाशित होते हुए हनुमानजी का रूप प्रज्वलित अग्नि के समान भयंकर हो गया था॥14॥
 
At that time, the form of Hanumanji, roaring and glowing with brilliance, had become as fierce as a blazing fire. 14॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)