श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 55: रावण की आज्ञा से अकम्पन आदि राक्षसों का युद्ध में आना और वानरों के साथ उनका घोर युद्ध  »  श्लोक 3
 
 
श्लोक  6.55.3 
एष शास्ता च गोप्ता च नेता च युधि सत्तम:।
भूतिकामश्च मे नित्यं नित्यं च समरप्रिय:॥ ३॥
 
 
अनुवाद
अकम्पन को युद्ध में सदैव रुचि रहती है। वह सदैव मेरी उन्नति चाहता है। वह युद्ध में महान योद्धा माना जाता है। वह शत्रुओं को दण्ड देने, अपने सैनिकों की रक्षा करने तथा युद्धभूमि में सेना का नेतृत्व करने में समर्थ है।॥3॥
 
‘Akampana always loves war. He always wants my progress. He is considered to be a great warrior in war. He is capable of punishing the enemies, protecting his soldiers and leading the army on the battlefield.॥ 3॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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