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ramayan 6.55.21-22h: उन दहाड़ते और दौड़ते प्राणियों की भयानक आवाजें युद्धभूमि में सभी को सुनाई दे रही थीं, परन्तु उनके रूप दिखाई नहीं दे रहे थे।   |   ramayan सर्ग 6.55: रावण की आज्ञा से अकम्पन आदि राक्षसों का युद्ध में आना और वानरों के साथ उनका घोर युद्ध   ।   ramayan काण्ड 6: युद्ध काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  6.55.21-22h 
शब्दश्च सुमहांस्तेषां नर्दतामभिधावताम्॥ २१॥
श्रूयते तुमुलो युद्धे न रूपाणि चकाशिरे।
 
 
अनुवाद
उन दहाड़ते और दौड़ते प्राणियों की भयानक आवाजें युद्धभूमि में सभी को सुनाई दे रही थीं, परन्तु उनके रूप दिखाई नहीं दे रहे थे।
 
The terrifying sounds of those roaring and running creatures could be heard by everyone on the battlefield, but their forms were not visible. 21/2
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)