श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 55: रावण की आज्ञा से अकम्पन आदि राक्षसों का युद्ध में आना और वानरों के साथ उनका घोर युद्ध  »  श्लोक 2
 
 
श्लोक  6.55.2 
शीघ्रं निर्यान्तुदुर्धर्षा राक्षसा भीमविक्रमा:।
अकम्पनं पुरस्कृत्य सर्वशस्त्रास्त्रकोविदम्॥ २॥
 
 
अनुवाद
अक्पान समस्त अस्त्र-शस्त्रों का विशेषज्ञ है, अतः उसे आगे रखकर भयंकर एवं पराक्रमी दुर्धर्ष राक्षस शीघ्र ही युद्ध के लिए यहाँ से चले जाएँ॥2॥
 
Akpan is the expert of all weapons, hence, keeping him in front, the fierce and mighty Durhadharsh Rakshas should quickly leave from here for the war. 2॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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