Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
ramayan 6.55.17-18h: वानर और राक्षस एक-दूसरे को मारने के इरादे से वहाँ इकट्ठे हुए थे। वे युद्धभूमि में बहुत आक्रामक थे। वे शोर मचा रहे थे और एक-दूसरे पर गुस्से से दहाड़ रहे थे। उनकी तेज़ आवाज़ दूर-दूर तक सुनाई दे रही थी।   |   ramayan सर्ग 6.55: रावण की आज्ञा से अकम्पन आदि राक्षसों का युद्ध में आना और वानरों के साथ उनका घोर युद्ध   ।   ramayan काण्ड 6: युद्ध काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 55: रावण की आज्ञा से अकम्पन आदि राक्षसों का युद्ध में आना और वानरों के साथ उनका घोर युद्ध  »  श्लोक 17-18h
 
 
श्लोक  6.55.17-18h 
हरयो राक्षसाश्चैव परस्परजिघांसया।
तेषां विनर्दतां शब्द: संयुगेऽतितरस्विनाम्॥ १७॥
शुश्रुवे सुमहान् कोपादन्योन्यमभिगर्जताम्।
 
 
अनुवाद
वानर और राक्षस एक-दूसरे को मारने के इरादे से वहाँ इकट्ठे हुए थे। वे युद्धभूमि में बहुत आक्रामक थे। वे शोर मचा रहे थे और एक-दूसरे पर गुस्से से दहाड़ रहे थे। उनकी तेज़ आवाज़ दूर-दूर तक सुनाई दे रही थी।
 
The monkeys and the demons had gathered there with the intention of killing each other. They were very aggressive on the battlefield. They were making noise and roaring angrily at each other. Their loud sound could be heard far and wide. 17 1/2.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)