श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 53: वज्रदंष्ट्र का सेना सहित युद्ध के लिये प्रस्थान, वानरों और राक्षसों का युद्ध, अङ्गद द्वारा राक्षसों का संहार  »  श्लोक 27
 
 
श्लोक  6.53.27 
जघ्ने तान् राक्षसान् सर्वान् धृष्टो वालिसुतो रणे।
क्रोधेन द्विगुणाविष्ट: संवर्तक इवानल:॥ २७॥
 
 
अनुवाद
परंतु जिस प्रकार प्रलयकाल में संवर्तक अग्नि प्राणियों का नाश कर देती है, उसी प्रकार बालिपुत्र अंगद और भी अधिक निर्भय होकर क्रोध में भरकर उन समस्त राक्षसों का संहार करने लगा॥27॥
 
But in the same way as Samvartak Agni destroys the living beings in the time of Doomsday, Vali's son Angad became even more fearless and filled with anger, he started killing all those demons. 27॥
 ✨ ai-generated
 
 
  Connect Form
  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
  © 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by acd