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ramayan 6.53.21: जब युद्धभूमि में वृक्षों, शिलाओं और शस्त्रों की भयंकर और भयंकर ध्वनि कानों में पड़ती थी, तब ऐसा प्रतीत होता था मानो हृदय विदीर्ण हो गया हो ॥21॥   |   ramayan सर्ग 6.53: वज्रदंष्ट्र का सेना सहित युद्ध के लिये प्रस्थान, वानरों और राक्षसों का युद्ध, अङ्गद द्वारा राक्षसों का संहार   ।   ramayan काण्ड 6: युद्ध काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  6.53.21 
द्रुमाणां च शिलानां च शस्त्राणां चापि नि:स्वन:।
श्रूयते सुमहांस्तत्र घोरो हृदयभेदन:॥ २१॥
 
 
अनुवाद
जब युद्धभूमि में वृक्षों, शिलाओं और शस्त्रों की भयंकर और भयंकर ध्वनि कानों में पड़ती थी, तब ऐसा प्रतीत होता था मानो हृदय विदीर्ण हो गया हो ॥21॥
 
When the loud and dreadful sound of the trees, rocks and weapons used on the battlefield reached one's ears, it seemed to pierce one's heart. ॥ 21॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)