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ramayan 6.53.2: क्रोध से कलुषित होकर उसने एक लंबी गर्म साँस ली और क्रूर रात्रिकालीन पराक्रमी वज्रदंष्ट्र से कहा-॥2॥   |   ramayan सर्ग 6.53: वज्रदंष्ट्र का सेना सहित युद्ध के लिये प्रस्थान, वानरों और राक्षसों का युद्ध, अङ्गद द्वारा राक्षसों का संहार   ।   ramayan काण्ड 6: युद्ध काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 53: वज्रदंष्ट्र का सेना सहित युद्ध के लिये प्रस्थान, वानरों और राक्षसों का युद्ध, अङ्गद द्वारा राक्षसों का संहार  »  श्लोक 2
 
 
श्लोक  6.53.2 
दीर्घमुष्णं विनि:श्वस्य क्रोधेन कलुषीकृत:।
अब्रवीद् राक्षसं क्रूरं वज्रदंष्ट्रं महाबलम्॥ २॥
 
 
अनुवाद
क्रोध से कलुषित होकर उसने एक लंबी गर्म साँस ली और क्रूर रात्रिकालीन पराक्रमी वज्रदंष्ट्र से कहा-॥2॥
 
Being tainted with anger, he took a long hot breath and said to the cruel night-time mighty Vajradanshtra -॥ 2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)