Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
ramayan 6.53.12: युद्ध के उद्देश्य से निकली हुई राक्षसों की सारी सेना वर्षा ऋतु में बिजली चमकाते हुए गरजते हुए बादल के समान शोभा पा रही थी ॥12॥   |   ramayan सर्ग 6.53: वज्रदंष्ट्र का सेना सहित युद्ध के लिये प्रस्थान, वानरों और राक्षसों का युद्ध, अङ्गद द्वारा राक्षसों का संहार   ।   ramayan काण्ड 6: युद्ध काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 53: वज्रदंष्ट्र का सेना सहित युद्ध के लिये प्रस्थान, वानरों और राक्षसों का युद्ध, अङ्गद द्वारा राक्षसों का संहार  »  श्लोक 12
 
 
श्लोक  6.53.12 
तद् राक्षसबलं सर्वं विप्रस्थितमशोभत।
प्रावृट्काले यथा मेघा नर्दमाना: सविद्युत:॥ १२॥
 
 
अनुवाद
युद्ध के उद्देश्य से निकली हुई राक्षसों की सारी सेना वर्षा ऋतु में बिजली चमकाते हुए गरजते हुए बादल के समान शोभा पा रही थी ॥12॥
 
The entire army of demons that had set out for the purpose of war looked like a thundering cloud during the rainy season with its lightning. ॥12॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)