श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 52: धूम्राक्ष का युद्ध और हनुमान जी के द्वारा उसका वध  »  श्लोक 37
 
 
श्लोक  6.52.37 
धूम्राक्षं निहतं दृष्ट्वा हतशेषा निशाचरा:।
त्रस्ता: प्रविविशुर्लङ्कां वध्यमाना: प्लवंगमै:॥ ३७॥
 
 
अनुवाद
धूम्राक्ष को मारा हुआ देखकर मरने को तत्पर दुःस्वप्न भयभीत हो गए और वानरों से पिटते हुए लंका में घुस गए ॥37॥
 
Seeing Dhumraksha killed, the nightmares who were about to die got scared and entered Lanka, being beaten by monkeys. 37॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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