श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 51: श्रीराम के बन्धनमुक्त होने का पता पाकर चिन्तित हए रावण का धूम्राक्ष को युद्ध के लिये भेजना  »  श्लोक 24-25
 
 
श्लोक  6.51.24-25 
विविधायुधहस्ताश्च शूलमुद‍्ग‍रपाणय:।
गदाभि: पट्टिशैर्दण्डैरायसैर्मुसलैरपि॥ २४॥
परिघैर्भिन्दिपालैश्च भल्लै: पाशै: परश्वधै:।
निर्ययू राक्षसा घोरा नर्दन्तो जलदा यथा॥ २५॥
 
 
अनुवाद
उनके हाथों में नाना प्रकार के अस्त्र-शस्त्र थे। कुछ लोगों के हाथों में भाले और गदाएँ थीं। अनेक भयानक राक्षस गदाएँ, लोहे की छड़ें, मूसल, भाले, पाश और कुल्हाड़ियाँ लेकर युद्ध के लिए निकले। वे सभी बादलों के समान ऊँचे स्वर में गर्जना कर रहे थे।
 
They had various types of weapons in their hands. Some people had spears and maces in their hands. Many terrible demons came out for the war with maces, iron rods, pestles, spears, nooses and axes. All of them roared loudly like the clouds.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)