श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 50: विभीषण को इन्द्रजित समझकर वानरों का पलायन, गरुड़ का आना और श्रीराम लक्ष्मण को नागपाश से मुक्त करके जाना  »  श्लोक 63
 
 
श्लोक  6.50.63 
अपरे स्फोटॺ विक्रान्ता वानरा नगयोधिन:।
द्रुमानुत्पाटॺ विविधांस्तस्थु: शतसहस्रश:॥ ६३॥
 
 
अनुवाद
अन्य महाबली वानर हाथ में वृक्ष और पर्वत शिखर लेकर युद्ध करते हुए नाना प्रकार के वृक्षों को उखाड़कर लाखों की संख्या में युद्ध के लिए खड़े हो गए ॥ 63॥
 
The other mighty monkeys, who fought with trees and mountain peaks in their hands, uprooted trees of various kinds and stood up in millions for the battle. ॥ 63॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)