श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 50: विभीषण को इन्द्रजित समझकर वानरों का पलायन, गरुड़ का आना और श्रीराम लक्ष्मण को नागपाश से मुक्त करके जाना  »  श्लोक 45
 
 
श्लोक  6.50.45 
तमुवाच महातेजा वैनतेयो महाबल:।
पतत्त्रिराज: प्रीतात्मा हर्षपर्याकुलेक्षणम्॥ ४५॥
 
 
अनुवाद
तब महाबली और पराक्रमी पक्षीराज विनतरनन्द गरुड़ ने मन में प्रसन्न होकर हर्षांसुओं से भरे हुए नेत्रों से श्री राम से कहा-॥45॥
 
Then the mighty and powerful bird king, Vinatarananda Garuda, being pleased in his heart, said to Shri Ram with his eyes filled with tears of joy -॥ 45॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)