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श्रीमद् वाल्मीकि रामायण
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काण्ड 6: युद्ध काण्ड
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सर्ग 50: विभीषण को इन्द्रजित समझकर वानरों का पलायन, गरुड़ का आना और श्रीराम लक्ष्मण को नागपाश से मुक्त करके जाना
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श्लोक 37
श्लोक
6.50.37
तमागतमभिप्रेक्ष्य नागास्ते विप्रदुद्रुवु:।
यैस्तु तौ पुरुषौ बद्धौ शरभूतैर्महाबलै:॥ ३७॥
अनुवाद
उनको आते देख वे महाबली सर्प, जिन्होंने बाणों का रूप धारण करके उन दोनों महापुरुषों को बाँध लिया था, वे सब वहाँ से भाग गए ॥37॥
Seeing them coming, the mighty serpents who had taken the form of arrows and had tied up those two great men, all ran away from there. ॥ 37॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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