श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 50: विभीषण को इन्द्रजित समझकर वानरों का पलायन, गरुड़ का आना और श्रीराम लक्ष्मण को नागपाश से मुक्त करके जाना  »  श्लोक 1
 
 
श्लोक  6.50.1 
अथोवाच महातेजा हरिराजो महाबल:।
किमियं व्यथिता सेना मूढवातेव नौर्जले॥ १॥
 
 
अनुवाद
उस समय महाबली एवं पराक्रमी वानरराज सुग्रीव ने पूछा, 'वानरों! जैसे तूफान से घिरी हुई नाव जल में डगमगाने लगती है, उसी प्रकार हमारी सेना सहसा व्याकुल हो गई है। इसका क्या कारण है?'॥1॥
 
At that time the mighty and powerful monkey king Sugreeva asked, 'Monkeys! Just as a boat hit by a storm starts to sway in the water, similarly our army has suddenly become distressed. What is the reason for this?'॥ 1॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)