श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 5: श्रीराम का सीता के लिये शोक और विलाप  »  श्लोक 9
 
 
श्लोक  6.5.9 
अवगाह्यार्णवं स्वप्स्ये सौमित्रे भवता विना।
एवं च प्रज्वलन् कामो न मा सुप्तं जले दहेत्॥ ९॥
 
 
अनुवाद
सुमित्रानंदन! आप यहीं रहें। मैं समुद्र के भीतर जाकर आपके बिना अकेली सो जाऊँगी। इस प्रकार जल में सोने से यह प्रेम की प्रज्वलित अग्नि मुझे जला नहीं सकेगी॥9॥
 
Sumitra Nandan! You stay here. I will go inside the ocean and sleep alone without you. By sleeping in the water like this, this blazing fire of love will not be able to burn me.॥ 9॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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