| श्रीमद् वाल्मीकि रामायण » काण्ड 6: युद्ध काण्ड » सर्ग 5: श्रीराम का सीता के लिये शोक और विलाप » श्लोक 8 |
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| | | | श्लोक 6.5.8  | तद्वियोगेन्धनवता तच्चिन्ताविमलार्चिषा।
रात्रिंदिवं शरीरं मे दह्यते मदनाग्निना॥ ८॥ | | | | | | अनुवाद | | प्रेम की अग्नि जिसका ईंधन मेरे प्रियतम से वियोग है, जिसकी चिंता उसकी प्रज्वलित लपटें हैं, वह दिन-रात मेरे शरीर को जलाती रहती है। 8. | | | | The fire of love whose fuel is the separation from my beloved, whose care for him is the glowing flames, keeps burning my body day and night. 8. | | ✨ ai-generated | | |
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