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श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 5: श्रीराम का सीता के लिये शोक और विलाप  »  श्लोक 7
 
 
श्लोक  6.5.7 
तन्मे दहति गात्राणि विषं पीतमिवाशये।
हा नाथेति प्रिया सा मां ह्रियमाणा यदब्रवीत्॥ ७॥
 
 
अनुवाद
मेरी प्रिय सीता ने अपहरण के समय जिस प्रकार मुझे 'हे ​​प्रभु!' कहा था, वह मेरे शरीर के सभी अंगों को जला रहा है, जैसे कोई अपने पेट में जहर पी लेता है।
 
The way my beloved Sita called me 'Oh Lord!' while being abducted, is burning all my body parts like the poison that one has drunk in his stomach.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)