श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 5: श्रीराम का सीता के लिये शोक और विलाप  »  श्लोक 21
 
 
श्लोक  6.5.21 
कदा शोकमिमं घोरं मैथिलीविप्रयोगजम्।
सहसा विप्रमोक्ष्यामि वास: शुक्लेतरं यथा॥ २१॥
 
 
अनुवाद
ऐसा समय कब आएगा जब मैं मिथिलेश की पुत्री के वियोग से उत्पन्न इस भयंकर दुःख को अचानक मैले वस्त्र की भाँति त्याग दूँगा?'
 
When will such a time come when I will suddenly abandon this terrible grief caused by the separation from Mithilesh's daughter, like a dirty garment?'
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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