श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 5: श्रीराम का सीता के लिये शोक और विलाप  »  श्लोक 18
 
 
श्लोक  6.5.18 
स्वभावतनुका नूनं शोकेनानशनेन च।
भूयस्तनुतरा सीता देशकालविपर्ययात्॥ १८॥
 
 
अनुवाद
‘स्वभाव से दुबली-पतली सीता प्रतिकूल समय और स्थान में होने के कारण शोक और उपवास से और भी दुर्बल हो गई होंगी।॥18॥
 
‘Sita, who was thin by nature, must have become even weaker by mourning and fasting because of being in an unfavorable time and place.॥ 18॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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