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श्लोक 6.5.18  |
स्वभावतनुका नूनं शोकेनानशनेन च।
भूयस्तनुतरा सीता देशकालविपर्ययात्॥ १८॥ |
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| अनुवाद |
| ‘स्वभाव से दुबली-पतली सीता प्रतिकूल समय और स्थान में होने के कारण शोक और उपवास से और भी दुर्बल हो गई होंगी।॥18॥ |
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| ‘Sita, who was thin by nature, must have become even weaker by mourning and fasting because of being in an unfavorable time and place.॥ 18॥ |
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