श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 5: श्रीराम का सीता के लिये शोक और विलाप  »  श्लोक 12
 
 
श्लोक  6.5.12 
कदा नु खलु सुश्रोणीं शतपत्रायतेक्षणाम्।
विजित्य शत्रून् द्रक्ष्यामि सीतां स्फीतामिव श्रियम्॥ १२॥
 
 
अनुवाद
वह समय कब आएगा, जब मैं शत्रुओं को परास्त करके, वैभवशाली राजलक्ष्मी के समान कमल-नेत्रों वाली सुमन्या सीता को देख सकूँगा? ॥12॥
 
When will that time come when, after defeating the enemies, I will be able to see the lotus-eyed Sumanya Sita who is like the prosperous Raj Lakshmi? ॥12॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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