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श्लोक 6.49.5  |
किं नु मे सीतया कार्यं लब्धया जीवितेन वा।
शयानं योऽद्य पश्यामि भ्रातरं युधि निर्जितम्॥ ५॥ |
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| अनुवाद |
| हाय! सीता मिल भी जाए तो क्या करूँगा? या इस जीवन का क्या करूँगा? जब आज मैं अपने पराजित भाई को युद्धभूमि में पड़ा हुआ देखता हूँ॥5॥ |
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| Alas! Even if I get Sita, what will I do with her? Or what will I do with this life itself? When today I see my defeated brother lying on the battlefield.॥ 5॥ |
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