श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 49: श्रीराम का सचेत हो लक्ष्मण के लिये विलाप करना और स्वयं प्राणत्याग का विचार करके वानरों को लौट जाने की आज्ञा देना  »  श्लोक 5
 
 
श्लोक  6.49.5 
किं नु मे सीतया कार्यं लब्धया जीवितेन वा।
शयानं योऽद्य पश्यामि भ्रातरं युधि निर्जितम्॥ ५॥
 
 
अनुवाद
हाय! सीता मिल भी जाए तो क्या करूँगा? या इस जीवन का क्या करूँगा? जब आज मैं अपने पराजित भाई को युद्धभूमि में पड़ा हुआ देखता हूँ॥5॥
 
Alas! Even if I get Sita, what will I do with her? Or what will I do with this life itself? When today I see my defeated brother lying on the battlefield.॥ 5॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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