श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 49: श्रीराम का सचेत हो लक्ष्मण के लिये विलाप करना और स्वयं प्राणत्याग का विचार करके वानरों को लौट जाने की आज्ञा देना  »  श्लोक 19
 
 
श्लोक  6.49.19 
सुरुष्टेनापि वीरेण लक्ष्मणेन न संस्मरे।
परुषं विप्रियं चापि श्रावितं तु कदाचन॥ १९॥
 
 
अनुवाद
मुझे एक भी घटना स्मरण नहीं आती जब वीर लक्ष्मण ने अत्यन्त क्रोधित होकर भी मुझसे कभी कोई कठोर या अप्रिय बात कही हो॥19॥
 
I do not remember a single incident when the brave Lakshmana, despite being extremely angry, ever said anything harsh or unpleasant to me.॥ 19॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)