श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 49: श्रीराम का सचेत हो लक्ष्मण के लिये विलाप करना और स्वयं प्राणत्याग का विचार करके वानरों को लौट जाने की आज्ञा देना  »  श्लोक 17
 
 
श्लोक  6.49.17 
यथैव मां वनं यान्तमनुयातो महाद्युति:।
अहमप्यनुयास्यामि तथैवैनं यमक्षयम्॥ १७॥
 
 
अनुवाद
जैसे महाबली लक्ष्मण मेरे पीछे-पीछे वन में जाते हुए चले थे, वैसे ही मैं भी उनके पीछे-पीछे यमलोक तक जाऊँगा॥ 17॥
 
Just as the mighty Lakshmana followed me while I was travelling in the forest, so I too will follow him to Yamaloka.॥ 17॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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