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श्लोक 6.49.16  |
बाणाभिहतमर्मत्वान्न शक्नोषीह भाषितुम्।
रुजा चाब्रुवतो यस्य दृष्टिरागेण सूच्यते॥ १६॥ |
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| अनुवाद |
| 'तुम्हारा प्राण-स्थान बाणों से छिदा हुआ है, अतः तुम यहाँ बोल भी नहीं सकते। यद्यपि तुम बोल नहीं रहे हो, तथापि तुम्हारे नेत्रों की लालिमा तुम्हारी मर्मान्तक पीड़ा का संकेत दे रही है।॥16॥ |
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| ‘Your vital spot has been pierced by the arrows, so you cannot even talk here. Although you are not speaking, yet the redness of your eyes is indicating your poignant pain.॥ 16॥ |
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