श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 49: श्रीराम का सचेत हो लक्ष्मण के लिये विलाप करना और स्वयं प्राणत्याग का विचार करके वानरों को लौट जाने की आज्ञा देना  »  श्लोक 15
 
 
श्लोक  6.49.15 
शयान: शरतल्पेऽस्मिन् सशोणितपरिस्रुत:।
शरभूतस्ततो भासि भास्करोऽस्तमिव व्रजन्॥ १५॥
 
 
अनुवाद
‘इस बाणों की शय्या पर तुम रक्त से लथपथ पड़े हो और बाणों से घिरे हुए तुम अस्त होते हुए सूर्य के समान चमक रहे हो।॥15॥
 
‘On this bed of arrows you are lying soaked in blood and surrounded by arrows you are shining like the setting sun.॥ 15॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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