श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 49: श्रीराम का सचेत हो लक्ष्मण के लिये विलाप करना और स्वयं प्राणत्याग का विचार करके वानरों को लौट जाने की आज्ञा देना  »  श्लोक 13
 
 
श्लोक  6.49.13 
त्वं नित्यं सुविषण्णं मामाश्वासयसि लक्ष्मण।
गतासुर्नाद्य शक्तोऽसि मामार्तमभिभाषितुम्॥ १३॥
 
 
अनुवाद
लक्ष्मण! जब मैं अत्यन्त दुःखी होता था, तब तुम मुझे सदैव सांत्वना देते थे; परन्तु आज तुम नहीं रहे, अतः मुझ दुःखी से बात भी नहीं कर सकते॥13॥
 
Lakshmana! When I used to be deeply saddened, you always used to console me; but today you are no more, so you are unable to even talk to me who is in pain.॥ 13॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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