श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 49: श्रीराम का सचेत हो लक्ष्मण के लिये विलाप करना और स्वयं प्राणत्याग का विचार करके वानरों को लौट जाने की आज्ञा देना  »  श्लोक 11
 
 
श्लोक  6.49.11 
उपालम्भं न शक्ष्यामि सोढुमम्बासुमित्रया।
इहैव देहं त्यक्ष्यामि नहि जीवितुमुत्सहे॥ ११॥
 
 
अनुवाद
मैं सुमित्रा और उसकी माता की निन्दा सहन नहीं कर सकूँगा; इसलिए मैं यहीं इस शरीर का त्याग कर दूँगा। अब मुझमें जीने का उत्साह नहीं रहा॥11॥
 
I will not be able to bear the reproaches of Sumitra and her mother; therefore, I will give up this body here itself. I no longer have the enthusiasm to live.॥ 11॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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