श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 49: श्रीराम का सचेत हो लक्ष्मण के लिये विलाप करना और स्वयं प्राणत्याग का विचार करके वानरों को लौट जाने की आज्ञा देना  »  श्लोक 10
 
 
श्लोक  6.49.10 
कथं वक्ष्यामि शत्रुघ्नं भरतं च यशस्विनम्।
मया सह वनं यातो विना तेनाहमागत:॥ १०॥
 
 
अनुवाद
मैं भरत और शत्रुघ्न को कैसे बता पाऊंगा कि लक्ष्मण मेरे साथ वन में गए थे, किन्तु मैं उन्हें वहां भूल गया और उनके बिना ही वापस लौट आया?
 
How will I be able to tell the illustrious Bharata and Shatrughna that Lakshmana had accompanied me to the forest, but I lost him there and returned without him?
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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