श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 48: सीता का विलाप और त्रिजटा का उन्हें समझा-बुझाकर श्रीराम-लक्ष्मण के जीवित होने का विश्वास दिलाना  »  श्लोक 33
 
 
श्लोक  6.48.33 
त्यज शोकं च दु:खं च मोहं च जनकात्मजे।
रामलक्ष्मणयोरर्थे नाद्य शक्यमजीवितुम्॥ ३३॥
 
 
अनुवाद
‘जनकैशोरी! तुम्हें श्री राम और लक्ष्मण के लिए अपना शोक, शोक और मोह त्याग देना चाहिए। वे अब मर नहीं सकते।’॥33॥
 
‘Janakaishori! You should give up your grief, sorrow and attachment for Shri Ram and Lakshman. They cannot die now.’॥ 33॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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