श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 48: सीता का विलाप और त्रिजटा का उन्हें समझा-बुझाकर श्रीराम-लक्ष्मण के जीवित होने का विश्वास दिलाना  »  श्लोक 2
 
 
श्लोक  6.48.2 
ऊचुर्लाक्षणिका ये मां पुत्रिण्यविधवेति च।
तेऽद्य सर्वे हते रामे ज्ञानिनोऽनृतवादिन:॥ २॥
 
 
अनुवाद
‘समुद्रों के लक्षण जाननेवाले विद्वानों ने मुझे पुत्री और गुणवती बताया था। आज श्री राम के मर जाने से वे सभी ज्ञानी मिथ्यावादी हो गए॥2॥
 
‘The scholars who knew the characteristics of the oceans had described me as a daughter and a virtuous person. Today, due to the death of Shri Ram, all those knowledgeable people became liars. 2॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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