श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 48: सीता का विलाप और त्रिजटा का उन्हें समझा-बुझाकर श्रीराम-लक्ष्मण के जीवित होने का विश्वास दिलाना  »  श्लोक 16
 
 
श्लोक  6.48.16 
ननु वारुणमाग्नेयमैन्द्रं वायव्यमेव च।
अस्त्रं ब्रह्मशिरश्चैव राघवौ प्रत्यपद्यत॥ १६॥
 
 
अनुवाद
‘किन्तु ये दोनों रघुवंशी भाई वरुण, अग्नि, ऐन्द्र, वायव्य और ब्रह्मशिरा आदि अस्त्रों को जानते थे। मरने से पहले उन्होंने उन अस्त्रों का प्रयोग क्यों नहीं किया?॥16॥
 
‘But these two Raghuvanshi brothers knew the weapons like Varuna, Agniya, Aindra, Vayavya and Brahmashira. Why did they not use those weapons before dying?॥ 16॥
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