श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 48: सीता का विलाप और त्रिजटा का उन्हें समझा-बुझाकर श्रीराम-लक्ष्मण के जीवित होने का विश्वास दिलाना  »  श्लोक 1
 
 
श्लोक  6.48.1 
भर्तारं निहतं दृष्ट्वा लक्ष्मणं च महाबलम्।
विललाप भृशं सीता करुणं शोककर्शिता॥ १॥
 
 
अनुवाद
अपने पति श्री राम और पराक्रमी लक्ष्मण को मारा हुआ देखकर सीता शोक से विह्वल होकर बार-बार करुण विलाप करने लगीं॥1॥
 
Seeing her husband Sri Rama and the mighty Lakshmana killed, Sita, overcome with grief, began to lament pitifully again and again.॥1॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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