श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 46: श्रीराम और लक्ष्मण को मूर्च्छित देख वानरों का शोक, इन्द्रजित का पिता को शत्रुवध का वृत्तान्त बताना  »  श्लोक 41
 
 
श्लोक  6.46.41 
तस्मादाश्वासयात्मानं बलं चाश्वासय स्वकम्।
यावत् सैन्यानि सर्वाणि पुन: संस्थापयाम्यहम्॥ ४१॥
 
 
अनुवाद
'अतः तुम अपना ध्यान रखो और अपनी सेना को आश्वस्त करो। तब तक मैं इस भयभीत सेना को धैर्य प्रदान करके शांति प्रदान करूँगा ॥41॥
 
‘So you take care of yourself and reassure your army. Till then I will bring this frightened army back to peace by instilling patience. ॥ 41॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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