| श्रीमद् वाल्मीकि रामायण » काण्ड 6: युद्ध काण्ड » सर्ग 46: श्रीराम और लक्ष्मण को मूर्च्छित देख वानरों का शोक, इन्द्रजित का पिता को शत्रुवध का वृत्तान्त बताना » श्लोक 3 |
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| | | | श्लोक 6.46.3  | नीलश्च द्विविदो मैन्द: सुषेण: कुमुदोऽङ्गद:।
तूर्णं हनुमता सार्धमन्वशोचन्त राघवौ॥ ३॥ | | | | | | अनुवाद | | हनुमान सहित नील, द्विविद, मैन्द, सुषेण, कुमुद और अंगद तुरंत श्रीरघुनाथ के लिये विलाप करने लगे। 3. | | | | Along with Hanuman, Neel, Dwivid, Maind, Sushen, Kumud and Angad immediately started mourning for Sri Raghunatha. 3. | | ✨ ai-generated | | |
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