श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 46: श्रीराम और लक्ष्मण को मूर्च्छित देख वानरों का शोक, इन्द्रजित का पिता को शत्रुवध का वृत्तान्त बताना  »  श्लोक 23
 
 
श्लोक  6.46.23 
तानर्दयित्वा बाणौघैस्त्रसयित्वा च वानरान्।
प्रजहास महाबाहुर्वचनं चेदमब्रवीत्॥ २३॥
 
 
अनुवाद
महाबाहु इन्द्रजित् अपने बाणों द्वारा उन वानरों को पीड़ित और भयभीत करके हँसने लगा और इस प्रकार कहने लगा - 23॥
 
After tormenting and scaring those monkeys with his arrows, the mighty-armed Indrajit started laughing and said thus - 23॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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