vedamrit
Reset
Home
ग्रन्थ
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण
श्रीमद् भगवद गीता
______________
श्री विष्णु पुराण
श्रीमद् भागवतम
______________
श्रीचैतन्य भागवत
वैष्णव भजन
About
Contact
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण
»
काण्ड 6: युद्ध काण्ड
»
सर्ग 46: श्रीराम और लक्ष्मण को मूर्च्छित देख वानरों का शोक, इन्द्रजित का पिता को शत्रुवध का वृत्तान्त बताना
»
श्लोक 13
श्लोक
6.46.13
नेमौ मोक्षयितुं शक्यावेतस्मादिषुबन्धनात्।
सर्वैरपि समागम्य सर्षिसङ्घै: सुरासुरै:॥ १३॥
अनुवाद
यदि समस्त देवता और दानव, ऋषियों सहित आ जाएँ, तो भी वे इन दोनों को बाणों के इस बंधन से मुक्त नहीं कर पाएँगे॥13॥
If all the gods and demons along with all the sages come, they will not be able to free these two from this bondage of arrows. 13॥
✨ ai-generated
Connect Form
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by acd