श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 45: इन्द्रजित के बाणों से श्रीराम और लक्ष्मण का अचेत होना और वानरों का शोक करना  »  श्लोक 5
 
 
श्लोक  6.45.5 
तेषां वेगवतां वेगमिषुभिर्वेगवत्तरै:।
अस्त्रवित् परमास्त्रस्तु वारयामास रावणि:॥ ५॥
 
 
अनुवाद
परंतु अस्त्र-शस्त्रों के पारंगत रावणकुमार इंद्रजित ने अपने उत्तम शस्त्रों द्वारा अत्यंत वेगशाली बाणों की वर्षा करके उन वेगवान वानरों की गति रोक दी॥5॥
 
But Ravanakumar Indrajit, the expert of weapons, stopped the speed of those fast monkeys with his excellent weapons by showering extremely fast arrows. 5॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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