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श्रीमद् वाल्मीकि रामायण
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काण्ड 6: युद्ध काण्ड
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सर्ग 44: रात में वानरों और राक्षसों का घोर युद्ध, अङ्गद के द्वारा इन्द्रजित की पराजय, इन्द्रजित द्वारा श्रीराम और लक्ष्मण को बाँधना
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श्लोक 18
श्लोक
6.44.18
तेषामापततां शब्द: क्रुद्धानामपि गर्जताम्।
उद्वर्त इव सप्तानां समुद्राणामभूत् स्वन:॥ १८॥
अनुवाद
उस समय उन क्रोधित आक्रमणकारी राक्षसों की गर्जना ऐसी प्रतीत हो रही थी जैसे प्रलय के समय सात समुद्रों का कोलाहल हो रहा हो ॥18॥
At that time the roaring noises of those enraged attacking demons seemed like the uproar of the seven oceans at the time of a deluge. ॥18॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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