श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 43: द्वन्द्वयुद्ध में वानरों द्वारा राक्षसों की पराजय  »  श्लोक 4
 
 
श्लोक  6.43.4 
वानराणामपि चमूर्बृहती जयमिच्छताम्।
अभ्यधावत तां सेनां रक्षसां घोरकर्मणाम्॥ ४॥
 
 
अनुवाद
भगवान् राम की विजय चाहने वाली वानरों की वह विशाल सेना भी घोर कर्म करने वाली राक्षसों की सेना पर टूट पड़ी॥4॥
 
That huge army of monkeys, seeking victory for Lord Rama, also attacked the army of demons committing heinous deeds. ॥ 4॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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