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श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 43: द्वन्द्वयुद्ध में वानरों द्वारा राक्षसों की पराजय  »  श्लोक 37
 
 
श्लोक  6.43.37 
लाघवेन तु संयुक्तो विद्युन्माली निशाचर:।
अपक्रम्य रथात् तूर्णं गदापाणि: क्षितौ स्थित:॥ ३७॥
 
 
अनुवाद
रात्रिचर योद्धा विद्युन्माली तुरन्त ही बड़ी फुर्ती से रथ से नीचे कूद पड़ा और हाथ में गदा लेकर भूमि पर खड़ा हो गया।
 
The nocturnal warrior Vidyunmali immediately jumped down from the chariot with great agility and stood on the ground with his mace in his hand.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)