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स शरैरभिविद्धाङ्गो द्विविद: क्रोधर्मूच्छित:।
सालेन सरथं साश्वं निजघानाशनिप्रभम्॥ ३४॥
अनुवाद
द्विविद का पूरा शरीर बाणों से घायल हो गया था। इससे वह अत्यंत क्रोधित हुआ और उसने एक साल वृक्ष का उपयोग करके अशनिप्रभा को उसके रथ और घोड़ों सहित मार डाला।
Dvivida's entire body was wounded by arrows. This enraged him a lot and he killed Ashaniprabha along with his chariot and horses using a sal tree.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥