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ramayan 6.43.27: तब श्री रामजी ने क्रोधित होकर समरांगण में अग्निशिखा के समान भयंकर बाणों द्वारा उन चारों के सिर काट डाले॥27॥   |   ramayan सर्ग 6.43: द्वन्द्वयुद्ध में वानरों द्वारा राक्षसों की पराजय   ।   ramayan काण्ड 6: युद्ध काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 43: द्वन्द्वयुद्ध में वानरों द्वारा राक्षसों की पराजय  »  श्लोक 27
 
 
श्लोक  6.43.27 
तेषां चतुर्णां रामस्तु शिरांसि समरे शरै:।
क्रुद्धश्चतुर्भिश्चिच्छेद घोरैरग्निशिखोपमै:॥ २७॥
 
 
अनुवाद
तब श्री रामजी ने क्रोधित होकर समरांगण में अग्निशिखा के समान भयंकर बाणों द्वारा उन चारों के सिर काट डाले॥27॥
 
Then Shri Ram became enraged and cut off the heads of all four of them in Samarangana with arrows as fierce as Agnishikha. 27॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)