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श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 43: द्वन्द्वयुद्ध में वानरों द्वारा राक्षसों की पराजय  »  श्लोक 23-24h
 
 
श्लोक  6.43.23-24h 
नदन् प्रतपनो घोरो नलं सोऽभ्यनुधावत।
नल: प्रतपनस्याशु पातयामास चक्षुषी॥ २३॥
भिन्नगात्र: शरैस्तीक्ष्णै: क्षिप्रहस्तेन रक्षसा।
 
 
अनुवाद
उधर, भयानक राक्षस प्रतापन भयंकर गर्जना करता हुआ नल की ओर झपटा। उसने अपने हाथों को तेज़ी से चलाते हुए तीखे बाणों से नल के शरीर को क्षत-विक्षत कर दिया। फिर नल ने तुरंत उसकी दोनों आँखें निकाल लीं।
 
On the other hand, the terrible demon Pratapana roared horribly and rushed towards Nala. The demon, moving his hands swiftly, mutilated Nala's body with his sharp arrows. Then Nala immediately took out both his eyes.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)